वाराणसी, जून 29 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। किसी नाटक में अभिनय, संवाद, सेट, संगीत, ड्रेस, मेकअप ये सारी चीजें एक तरफ और प्रकाश एक तरफ। यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रकाश संयोजन में होने वाले उतार-चढ़ाव के साथ-साथ नाटक की सांसें ऊपर-नीचे होती हैं। यह कहना है राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के प्रकाश विशेषज्ञ डॉ.गोविंद सिंह यादव का। वह इन दिनों भारतेंदु नाट्य अकादमी के सहयोग से नागरी नाटक मंडली में प्रकाश पर आयोजित कार्यशाला में काशी के युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। यह भी पढ़ें- पुरानी शैली से पार पाने को जूझे रंग प्रशिक्षु प्रकाश का महत्व आप के अपने अखबार 'हिन्दुस्तान' से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि यह दुखद पक्ष है कि भारत में अभी नाटकों में लाइट को उतना महत्व नहीं दिया जाता जितना दिया जाना चाहिए। प्रकाश के प्रभाव से वह सब व्यक्त किया जा सकता...