प्रयागराज, मार्च 26 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि धर्मनिरपेक्ष भारत में किसी भी व्यक्ति द्वारा यह दावा करना गलत है कि कोई विशेष धर्म 'एकमात्र सच्चा धर्म' है। क्योंकि ऐसा करने से अन्य धर्मों का अपमान होता है और प्रथम दृष्टया यह आईपीसी की धारा 295ए के अंतर्गत आता है। न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ ने रेवरेंड फादर विनीत विंसेंट परेरा की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिन पर आईपीसी की धारा 295ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, किसी वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से उसके धर्म या धार्मिक मान्यताओं का अपमान करना) के तहत आरोप हैं। आरोप है कि याची ने कथित तौर पर प्रार्थना सभाएं आयोजित कीं, जहां उसने अक्सर कहा कि ईसाई धर्म ही एकमात्र धर्म है, जिससे एक विशेष धर्म, अर्थात हिंदू धर्म की भा...