हेमलता कौशिक, मई 1 -- दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी लोक सेवक (सरकारी कर्मचारी) द्वारा धन प्राप्त करना तब तक रिश्वत नहीं माना जा सकता, जब तक स्पष्ट रूप से यह सिद्ध न हो जाए कि वह राशि किसी अवैध सरकारी लाभ पहुंचाने या पक्षपात के बदले दी गई है। उच्च न्यायालय ने कहा कि भले ही इस धन को लेकर लोकसेवक द्वारा स्पष्टीकरण ना दिया गया हो। जस्टिस संजीव नरूला की पीठ ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए केन्द्रीय भंडारण निगम (CWC) के एक अधिकारी को सेवा से हटाने का आदेश रद्द कर दिया। पीठ ने कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर भ्रष्टाचार का आरोप टिकाऊ नहीं है। इस बारे में नौकरी से हटाए गए इसी अधिकारी ने एक याचिका लगाई थी। यह भी पढ़ें- दिल्ली के 48 गांवों को मिलेगा शहरी दर्जा, बेहतर होंगी कई बुनियादी सुविधाएंतीन आरोपों के...