मोतिहारी, अप्रैल 30 -- पीपराकोठी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा मनीछापरा गांव में कार्बनिक एवं हरी खाद के उपयोग विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान किसानों के बीच ढैंचा बीज का वितरण भी किया गया। यह भी पढ़ें- हरी खाद से मिट्टी की उर्वरा को मिलती है संजीवनीकार्यक्रम की जानकारी कार्यक्रम में आईसीएआर पटना के वैज्ञानिकों ने किसानों को हरी खाद के उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार तथा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने बताया कि एक हेक्टेयर खेत में ढैंचा की खेती कर उसे मिट्टी में मिलाने से लगभग 40 से 50 किलोग्राम यूरिया की बचत की जा सकती है। इससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है। वैज्ञानिकों ने फसल चक्र में धान्य फसलों के बीच दलहन फसलों ...