वाराणसी, फरवरी 12 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। पड़ोस के शिव मंदिर में बड़ों को भजन करते सुन, उन भजनों को अपने शब्दों में ढालने का संस्कार हीरालाल मिश्र 'मधुकर' को आठ वर्ष की अवस्था में प्राप्त हुआ। 15 वर्ष की अवस्था तक देशभक्ति, नैतिकता और सांस्कृतिक विरासत पर केंद्रित पुस्तकीय कृतियों की कतार लगा दी। यह कहना है उन वक्ताओं के जो गुरुवार को रामापुरा स्थित मातृ मंदिर कन्या गुरुकुल के सभागार में जुटे थे। महिला सशक्तीकरण कवि गोष्ठी मंच की ओर से हुए अभिनंदन समारोह में कवि 'मधुकर' को 'महाकवि' अलंकरण भेंट किया गया। वक्ताओं ने कहा कि गीत, ग़ज़ल, दोहा, छंद, चौपाई आदि काव्यात्मक विधाओं में समान दक्षता रखने के साथ ही वह मुक्तकों के श्रेष्ठ रचनाकार हैं। कजरी विधा पर उन्होंने वृहद शोध किया है। उनकी लेखन यात्रा के पड़ावों के बारे में कार्यक्रम संयोजक क...