वाराणसी, मई 4 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। पद्म विभूषण पं. किशन महाराज अक्खड़ होने के साथ ही फक्कड़ बनारसी भी थे। वह लुंगी-गंजी पहनकर एक गमछा कंधे पर रखकर पूरा बनारस घूम लेते थे। उनके जैसा व्यक्तित्व दोबारा बनारस को मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। 18वीं पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर शनिवार को उनका स्मरण करते हुए उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पद्मश्री प्रो.राजेश्वर आचार्य ने कहा कि तबला वादन में रियाज के साथ गणित को विशेष तरजीह देने वाले पं. किशन महाराज ने मंच पर और मंच से परे कई ऐसे यादगार कार्य किए हैं, जिन्हें लोग शायद ही कभी भूलें। यह भी पढ़ें- एक तरफ अमेरिका से आया दस तारों वाला डबल वायलिन। दूसरी तरफ कोलकाता से आया सौ तारों वाला कश्मीरी वाद्ययंत्र संतूर। दो अलग-अलग धाराओं के तंत्रवाद्यों को जुगलबंदी के लिए तैयार कर...
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