किशनगंज, सितम्बर 8 -- किशनगंज। इल्म का चिराग जब दिलों में जलता है, तब जाके अंधेरों में उजाला पलता है और इसी चिराग को किशनगंज जिले में जलाने वाले शख्स थे - शिक्षाविद् व पद्मश्री डॉ. सैयद हसन। किशनगंज, जो कभी शिक्षा के मामले में बिहार का सबसे पिछड़ा जिला माना जाता था, आज किशनगंज जिला शिक्षा का हब बनते जा रहा है। मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, कृषि कॉलेज से लेकर उच्च शिक्षा का केन्द्र बन रहा है। 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस के अवसर पर, बिहार के सीमांचल क्षेत्र में शिक्षा और साक्षरता की अलख जगाने वाले शिक्षाविद् पद्मश्री डॉ. सैयद हसन (जिन्हें आदर से लोग 'सैयद भाई' भी कहते हैं) को याद करना अत्यंत प्रासंगिक है। डॉ. सैयद हसन का जन्म 30 सितंबर 1924 को बिहार के जहानाबाद जिले के काको में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के जामिया म...