भागलपुर, सितम्बर 16 -- अवधेश झा की रिपोर्ट किशनगंज, निज संवाददाताग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित मातृत्व केवल अस्पताल तक पहुंच बनाने का विषय नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे को मजबूत करने की प्रक्रिया भी है, जिसके आधार पर गर्भवती महिला और उसका परिवार प्रसव के लिए स्वास्थ्य संस्थान को चुनता है। लंबे समय से चली आ रही घरेलू प्रसव की परंपरा, अस्पताल को लेकर डर, ऑपरेशन की आशंका और स्वास्थ्य सेवाओं की सीमित जानकारी कई परिवारों को संस्थागत प्रसव से दूर रखती रही है। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों की लगातार समझाइश, गर्भवती महिलाओं की समय पर ट्रैकिंग और स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर सेवाओं की उपलब्धता धीरे-धीरे इस सोच को बदल रही है। टेढ़ागाछ प्रखंड की बोढ़ा पंचायत के फुलबरी गांव की मुस्कान खातून की कहानी इसी बदलाव की एक जमीनी मिसाल है। एक ही महिला के दो प्रसव ...