भागलपुर, अगस्त 25 -- किशनगंज से अवधेश झा की रिपोर्ट एनीमिया को अक्सर सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि लंबे समय तक हीमोग्लोबिन की कमी रहने से व्यक्ति की कार्यक्षमता, शारीरिक विकास और स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। बच्चों, किशोर-किशोरियों और महिलाओं में भी इसका असर स्वास्थ्य एवं विकास पर पड़ता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए बिहार में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत 25 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक 98 दिनों का विशेष अभियान शुरू किया गया है।

अभियान का राज्यस्तरीय शुभारंभ मुख्यमंत्री द्वारा मंगलवार को किया गया। किशनगंज जिले में सदर अस्पताल एवं पोठिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यक्रम का प्रसारण किया गया। सदर अस्पताल में जिला पदाधि...