मुजफ्फरपुर, मार्च 12 -- मुजफ्फरपुर, हिटी। ईद करीब आते ही सेवई की दुकानें सजने लगी हैं। खरीदारों की भीड़ से शहर के बाजार गुलजार हो उठे हैं। बनारस की किमामी, कोलकाता की लच्छा और स्थानीय माकूती सेवइयों की बिक्री जोरों पर है। इन सबके बीच बाजार में हाथ से बनी सेवइयां भी थोड़ी-बहुत दिख जाएंगी। लच्छा और किमामी के जमाने में उन मीठी यादों के तौर पर ये अब भी मौजूद हैं, जिनके चलन से मोहल्ले में दस दिन पहले ईद दस्तक दे देती थी। मदरसा चौक के बुजुर्ग अफसारुल हक, मो. नईम, अबुल कलाम, मो. कमाल बताते हैं कि आधुनिक मशीन के जमाने में हाथ की बनीं सेवइयां अब कम नजर आती हैं। वक्त के साथ बदलाव आम बात है, लेकिन पहले जब पड़ोस की औरतें एक जगह बैठकर हाथ वाली छोटी मशीन से सेवइयां बनाती थीं तो अलग उत्साह रहता था। सेवइयों को बनाने से सुखाने की हफ्तेभर की प्रक्रिया के द...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.