बांदा, अप्रैल 6 -- बांदा। शासन प्रशासन और शिक्षा विभाग की चुप्पी से अभिभावक बच्चों की पढ़ाई में लुट रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का बस्ता व फीस में 20 से 25 हजार रुपये खर्चा आ रहा है। प्राइवेट विद्यालयों के संचालक और दुकानदारों के बीच कमीशनबाजी में अभिभावकों की जेब खाली हो रही है। संचालक विद्यालयों में तमाम सुविधाओं व अच्छी पढ़ाई का दावा कर अभिभावकों से मनमानी फीस वसूल रहे हैं। साथ ही दुकानदार किताबों आदि में प्रकाशित मूल्य में एक रुपये नहीं कम कर रहे हैं। जिले में संचालित करीब दो सौ प्राइवेट स्कूलों में इस समय प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। विद्यालयों में जो बच्चे पूर्व से पढ़ रहे हैं, कक्षोन्नति के बाद उन्हें नई किताबें लेने के लिए ही बाध्य किया जा रहा है। स्कूलों से बकायदा उन्हें बुक डिपो का पर्चा दिया जा रहा है, जिसमें...