संतोष आर्यन, मई 5 -- छह साल पहले जिस युवक के हाथों में भविष्य संवारने वाली किताबें, सुनहरे सपने होने चाहिए थे, वहां पुलिस की तफ्तीश ने हथकड़ियां पहना दीं। हम बात कर रहे हैं पिथौरागढ़ के छात्र नीरज की। नीरज के भाई ने हिन्दुस्तान से खास बातचीत में कहा कि रातों-रात समाज की नजरों में वह कातिल बन गया था। सोमवार को नैनीताल हाई कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में युवक को बरी करने का फैसला सुनाया। कानूनी तौर पर वह आजाद तो हो गया है, लेकिन सिस्टम से चली इस लंबी लड़ाई ने उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी। सलाखों के पीछे बर्बाद हुई जवानी के साथ-साथ सामाजिक कलंक के कारण उसका पैतृक घर भी छूट गया। यह भी पढ़ें- बंगाल-असम की जीत में छाया उत्तराखंड मॉडल, भाजपा ने किया है UCC का वादापढ़ाई के कमरे की जगह जेल की कालकोठरी ने ली 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में नीरज के बड़े भाई ग...