लखीसराय, अप्रैल 6 -- चानन।निज संबाददाता जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। अप्रैल महीने में ही जून जैसी भीषण गर्मी का असर महसूस होने लगा है। तेज गर्मी के कारण किऊल नदी का आंचल पानी के लिए तरसने लगा है। नदी के सूखने से भूगर्भ जलस्तर पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। खेतों में खड़ी फसलें पानी के अभाव में सूख रही हैं, जबकि पशुपालकों के लिए मवेशियों को पानी उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया है। कुंदर से किऊल तक फैली नदी में कहीं भी पर्याप्त पानी नहीं बचा है। सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले कुंदर बराज का आंचल भी सूखने की कगार पर है। नदी में पानी नहीं रहने से उपजाऊ भूमि भी गर्मी में बंजर होती जा रही है। पहले नदी किनारे बसे किसान फसलों की सिंचाई के लिए इसी नदी के पानी पर निर्भर रहते थे, लेकिन इस बार नदी ने किसानों क...