लखीसराय, मई 3 -- चानन, निज संवाददाता। चानन से होकर गुजरी किऊल नदी का अस्तित्व संकट में पहुंच गया है। मौसम में आए बदलाव एवं नदी से हो रहे बालू खनन को लेकर नदी पर संकट का बादल मंडराने लगा है। लाल रेत में सोना उगलने वाली किऊल नदी में कहीं भी पर्याप्त पानी दिखाई नहीं पड़ता है। नदी में पानी नहीं रहने से जलीय जीव भी खत्म हो गया हैं। ऐसे में अब नदी के नाम पर सिर्फ रेगिस्तान ही बचा है। झारखंड के अलावा बिहार के जमुई और लखीसराय की लाइफ लाइन किऊल नदी में कभी लबालब पानी रहता था। पानी के तेज बहाव के कारण पहाड़ों के पत्थरों के टुकड़ों का चूर्ण बालू बनकर पानी के साथ आता था। बारिश के मौसम के बाद नदी लाल रेत के सोने की खेत की तरह चमचमाती थी। पर अब वो दिन इतिहास बन गए हैं। बारिश कम होने से पानी के साथ ही बालू का बहाव अब नहीं के बराबर हो रहा है।
दर्जन भर गांव...
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