नई दिल्ली, दिसम्बर 31 -- गोपाल कृष्ण गांधी,पूर्व राज्यपाल साल 2025 में शांति को युद्ध ने हड़प लिया। दुनिया सर्वनाश के इतने करीब पहले कभी न आई थी। इजरायल-गाजा, रूस-यूक्रेन, कंबोडिया-थाइलैंड में जंग ने अमन का दमन कर दिया। परमाणु बम के निर्माता ओपेनहाइमर ने गीता के श्लोक को लेकर 1945 में कहा था- मृत्यु: सर्वहरश्चाहम् (मैं वह मृत्यु हूं, जो सबका जीवन हर लेती है)- वह सच में परिणत होते-होते बचा। अमेरिका व रूस, दोनों ने परमाणु ताकत के इस्तेमाल की खुली धमकी दी। परमाणु बम फूटने बाकी थे। दुनिया तबाही की दहलीज पर थी। हमारे प्रधानमंत्री ने दुनिया में युद्ध के खतरों को रोकने के लिए कई कोशिशें की हैं। यह सराहनीय है, लेकिन निरस्त्रीकरण के लिए भारत कुछ कर भी रहा है? हम स्वयं जब परमाणु हथियारों पर निर्भर हैं, तब दूसरों को इस पर अंकुश लगाने को कह सकते हैं ...