वाराणसी, मार्च 18 -- वाराणसी, हिटी। राजस्थान की माटी जब गंगा तट की हवा से मिलती है तो संस्कृति का अद्भुत समागम जन्म लेता है। ऐसा ही दृश्य महमूरगंज स्थित शुभम् लॉन में देखने को मिला। श्री गवरजा माता उत्सव समिति की ओर से आयोजित सिंधारा कार्यक्रम में राजस्थानी लोकजीवन की रंग-बिरंगी छवि सजीव हो उठी। शुभारंभ वाराणसी के एडीजी पीयूष मोर्डिया एवं कैंटोमेंट बोर्ड के सीईओ सत्यमोहन की पत्नी स्वाति मित्तल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन से किया। आयोजन में शामिल 200 महिलाओं और बच्चों ने की प्रस्तुतियों ने काशी की फिजा में राजस्थानी संस्कृति की सुगंध बिखेर दी। 'मोरया रे. गणपति बप्पा मोरया' से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शुरू हुईं जो 'ओम नमः शिवाय', 'गोविंद बोलो हरे गोपाल बोलो', 'गणगौर तब से अब तक' परिपूर्ण हुईं। उन्होंने सतयुग से कलियुग तक की सांस्कृतिक य...
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