वाराणसी, मार्च 22 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। गोस्वामी तुलसीदास ने सदियों पहले काशी में अखाड़ों की नींव रखी थी। ये अखाड़े न केवल पहलवानी की परंपरा को जीवित रखते थे, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारियों के लिए रणनीति बनाने का गुप्त ठिकाना भी बने। ऐतिहासिक महत्व वाले अधिकतर अखाड़े उपेक्षा का शिकार हैं। इन्हें पुनर्जीवित करने के लिए पहलवानों को ही एकजुट होना होगा। ये बातें नगर के पहलवानों ने कहीं। वे रविवार को काशी अखाड़ा बचाओ संघर्ष समिति की ओर से हुए सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। जैतपुरा स्थित ज्वरहरेश्वर महादेव मंदिर में हुए सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने काशी के इन्हीं अखाड़ों से प्रेरित होकर युद्ध कौशल सीखा था। चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारी मंदिरों और अखाड़ों में रहकर देश की आजादी की लड़ाई लड़ते...