काव्य गोष्ठी में गूंजे समसामयिक सरोकार
आगरा, मई 29 -- साहित्य और संस्कृति के संवर्धन हेतु निरंतर सक्रिय "माधुर्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था" की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। साहित्यकार डॉ.जय सिंह नीरद ने सत्य घटना पर आधारित कोमा में पहुंचे एक युवा की मनःस्थिति का मार्मिक वर्णन एक कविता के माध्यम से किया तो श्रोताओं की आंखों में आंसू आ गए कविता के बोल थे 'मां तेरह सालों से टंगा हूं घुप अंधेरे की एक नोंक पर। डॉ. राजेंद्र मिलन कहा' सरकार क्यों खफा है, रासुका है मीसा है न जाने कौन कौन सी दफा है। 'कवियों ने बढ़ती गर्मी, पर्यावरणीय असंतुलन, सामाजिक विसंगतियों, मानवीय संवेदनाओं के क्षरण तथा देश के गरमाते सामाजिक-राजनीतिक माहौल जैसे समसामयिक विषयों पर प्रभावशाली रचनाएं प्रस्तुत कीं। कवि, ब्रज बिहारी बिरजू, डॉ.राजीव शर्मा निस्पृह, आचार्य उमाशंकर, रामेंद्र शर्मा, दीपक श्रीव...
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