वाराणसी, अप्रैल 28 -- वाराणसी, प्रमुख संवाददाता। अस्सी घाट पर काव्यार्चन के 58वें सत्र का आयोजन नारी वंदन को समर्पित रहा। काशी के वरिष्ठ एवं उदीयमान रचनाकारों ने विविध विषयों को समर्पित रचनाओं के साथ ही नारी की वंदना में भी विशेष रचनाओं का पाठ किया। वरिष्ठ रचनाकार डॉ. नागेश शांडिल्य की अध्यक्षता में मंगलवार को हुए सत्र की शुरुआत योग के लिए समर्पित युवा कवयित्री डॉ. अंजना त्रिपाठी ने नारी की वंदना अपने विस्तृत गीत से की। इस गीत की बानगी कुछ यूं रही 'नारी तू अबला नहीं, शक्ति का अवतार है, सृजन तुझसे, संहार तुझसे, तू संसार का सार है।' इस क्रम को नगर की उदीयमान रचनाकार पूनम गुप्ता 'पूर्वी' ने नारी शक्ति को समर्पित रचना के माध्यम से आगे बढ़ाया। पूर्वी ने सुनाया 'ये पांवों के घुंघरू, मेरी बेबसी का शोर हैं, मेरी तकदीर की ये, एक कच्ची सी डोर हैं'।...
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