नई दिल्ली, अगस्त 3 -- एस श्रीनिवासन,वरिष्ठ पत्रकार इस साल मानसून के कमजोर रहने से तमिलनाडु और कर्नाटक की सीमाओं पर फिर से तलवारें खिंच गई हैं। दोनों राज्य कावेरी जल बंटवारे को लेकर फिर आमने-सामने हैं। यह पानी खेती, पेयजल और मवेशियों के लिए बहुत जरूरी है। यह विवाद सदियों पुराना है और कावेरी के जलाशयों के जलग्रहण क्षेत्र (कैचमेंट एरिया) में पानी की कमी होने पर अक्सर उभर आता है। इस बार मेकेदातु बांध के निर्माण ने आग में घी का काम किया है। मौजूदा विवाद की शुरुआत केंद्र सरकार द्वारा संसद में दिए गए सवालों के जवाब से हुई। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने 26 जुलाई को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि कर्नाटक को कावेरी नदी पर मेकेदातु में बांध बनाने के लिए किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। इससे तमिलनाडु में हंगामा मच गया। राज्य सरकार ने केंद...