बांदा, अप्रैल 8 -- बांदा। बाबूलाल चौराहा में महिला थाना के पास ही पुलिस कर्मियों की आवासीय कालोनियां बनी हैं। यह भी 60 वर्ष से ज्यादा की मियाद पूरी कर चुकी हैं। एक खंड की बनी इन कालोनियों के भवन पूरी तरह जीर्ण-शीर्ण हो चुके है। पुराने-जमाने की तर्ज पर बनी कालोनी के खपरैल तक उखड़ चुके हैं। दीवारों में बड़ी दरारे हैं। यहां पुलिस कर्मचारी और उनके बीबी-बच्चे दहशत के साये में जिंदगी काटते हैं। एक सिपाही की पत्नी ने बताया कि रात में जब कभी तेज बारिश होती है तो छाता लगाकर बैठना पड़ता है। पूरी रात जागकर गुजरती है। अधिकारियों ने कालोनियां आवंटित कर दी हैं, पर यह नहीं देखा कि यहां रहने वाले लोग जिंदा रहेंगे या मरेंगे। वहीं एक सिपाही ने बताया कि बाहर कमरा लेते हैं तो छह से सात हजार रुपये खर्च होते हैं। इसलिए यहां किसी तरह समय काट रहे हैं। -पुलिस कर्...