किशनगंज, सितम्बर 23 -- किशनगंज, निज संवाददाता। काला-जार यानी विसरल लीशमैनियासिस एक गंभीर परजीवी बीमारी है, जो संक्रमित मादा बालू मक्खी (सैंडफ्लाई) के काटने से फैलती है। लंबे समय तक रहने वाला बुखार, वजन कम होना, खून की कमी तथा यकृत और प्लीहा के बढ़ने जैसे लक्षण इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं। समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, काला-जार की रोकथाम में जल्दी पहचान, त्वरित उपचार और सक्रिय रोगी खोज की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी को ध्यान में रखते हुए किशनगंज जिले में 21 से 30 सितंबर तक घर-घर काला-जार रोगी खोज अभियान चलाया जा रहा है। यह भी पढ़ें- काला-जार पर वार: घर-घर होगी मरीजों की तलाश, लंबे बुखार वालों की जांच पर जोर अभियान का उद्देश्य ऐसे संभावित मरीजों की पहचान करना है, जो बीमा...