मथुरा, जुलाई 13 -- छटीकरा मार्ग स्थित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आश्रम के सभागार में सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव हर्षोल्लास के साथ चल रहा है। छठवें दिन व्यासपीठ से भक्तों को महारास लीला, मथुरा गमन, कंस वध एवं भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि विवाह की कथा का रसास्वादन कराया गया। व्यास पीठाधीश्वर स्वामी गिरीशानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा ब्रज गोपिकाओं के साथ की गई महारास लीला अत्यंत दिव्य और रसमयी थी, क्योंकि महारास में सम्मिलित ब्रजगोपियां कोई साधारण स्त्रियां नहीं थीं। वो पूर्व जन्म के महान तपस्वी ऋषि-मुनि थे, जिन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को अपने पति के रूप में पाने के लिए अनन्त युगों तक कठोर तपस्या की थी। इसीलिए ब्रजगोपियां भी भगवान श्रीकृष्ण के समान ही परम आनंदमयी व चिन्मयी थीं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्...