प्रयागराज, जुलाई 16 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई कामकाजी मां अपनी आर्थिक क्षमता का दावा करते हुए नाबालिग बच्चे की कस्टडी प्राप्त करती है तो बाद में वह बच्चे के भरण-पोषण का पूरा वित्तीय बोझ केवल पिता पर नहीं डाल सकती। यदि मां भी पर्याप्त आय अर्जित कर रही है, तो बच्चे के खर्च दोनों माता-पिता अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार वहन करेंगे। प्रयागराज की रोजी बानो की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत शुक्ला ने यह टिप्पणी की। याचिका में फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें महिला को अंतरिम भरण-पोषण देने से इनकार किया गया, जबकि बेटी के लिए तीन हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण निर्धारित किया गया। मामले में महिला का कहना था कि बेटी को दी गई अंतरिम भरण-पोषण राशि बेहद कम है। उसने यह भी दावा किया कि...