कानपुर, फरवरी 3 -- कानपुर देहात,संवाददाता। सात जन्मों का रिश्ता भले ही वैवाहिक अनुष्ठान से जुड़ने की स्वीकारोक्ति मान्य हो गई। लेकिन मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए बिना साक्ष्य के कुछ भी नहीं हो पा रहा है। ससुराल से कही अधिक मायके के कागजों की जरुरत अब लोगो को समझ में आ रही है। एसआईआर अभियान के दौरान मैपिंग से छूटे मतदाताओं को आयोग की ओर से निर्धारित 13 कागजी साक्ष्य जुटाने में सर्दी के मौसम में पसीना छूट रहा है। बीते 13 जनवरी से एसआईआर के तहत जारी नोटिस की सुनवाई की जा रही है। ईआरओ,एईआरओ के साथ बड़ी संख्या में कार्मिकों की तैनाती कर हर दिन एक एईआरओ लगभग एक सैकड़ा नोटिसों की सुनवाई करने के साथ नोटिस जारी होने वाले मतदाता की फोटो व कागजी साक्ष्य पोर्टल पर अपलोड कर रहे है। लाखों की संख्या में नोटिस जारी होने के कारण एक ही समय में सुनवाई कर...