कागजों में ओडीएफ, हकीकत में खुले में शौच, दिन में शर्म और रात में डर
एटा, जून 17 -- साडरपुर गांव में 24 वर्षीय आशीष की हत्या ने केवल एक परिवार का चिराग नहीं बुझाया, बल्कि उन सरकारी दावों की परतें भी उधेड़ दी हैं। इनमें गांवों को खुले में शौच मुक्त ओडीएफ बताया जाता है। गांव में आज भी अधिकांश परिवार शौच के लिए खेतों और सुनसान रास्तों पर जाने को मजबूर हैं। महिलाओं का कहना है कि हत्या के बाद गांव में शाम ढलते ही सन्नाटा पसर जाता है। जिन रास्तों पर कभी महिलाएं और पुरुष शौच के लिए जाते थे, वहां अब डर का पहरा है। लोग बच्चों और महिलाओं को रात में घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे। गांव के लोगों का कहना है कि ओडीएफ के दावे सिर्फ फाइलों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। ग्रामीणों का आरोप है कि 1500 कि आबादी वाले गांव को कागजों में खुले में शौच मुक्त दिखाकर जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.