शाहजहांपुर, जनवरी 6 -- हजरत सैयद शाह शमसुद्दीन मियां रहमतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स शरीफ के चौथे दिन क़व्वाली की महफिल का आयोजन किया गया। महफिल में अकीदत और रूहानियत का माहौल बना रहा। प्रसिद्ध क़व्वाल अस्लम अकरम वारसी (वारसी ब्रदर्स) और शमीम वारसी ने अपने कलाम पेश किए। रविवार को आयोजित महफिल में क़व्वालों ने हम्द, नात, मनक़बत और सूफियाना कलाम सुनाए। "मन कुन्तो मौला" और "मेरे पीर की गुलामी मेरे काम आ गई" जैसे कलामों पर श्रोता झूमते नजर आए। इस दौरान परिसर "या अली", "या ख्वाजा" और "या ग़ौस" के नारों से गूंज उठा। उर्स शरीफ में दूर-दराज क्षेत्रों से आए अकीदतमंदों की बड़ी संख्या मौजूद रही। महफिल के बाद दरगाह शरीफ में चादरपोशी की गई और अमन-चैन, देश की तरक्की और भाईचारे के लिए दुआ की गई। कार्यक्रम के समापन पर दरगाह प्रबंधन की ओर से क़व्वालों और अ...