गोरखपुर, अगस्त 7 -- गोरखपुर, मुख्य संवाददाता। रेलवे में 150 साल से चली आ रही चूना-पत्थर डालने और पटाखे फोड़ने की परंपरा नए साल से समाप्त हो जाएगी। कवच सिस्टम आने के बाद कोहरे के दौरान रेल पटरियों पर न तो चूना गिराने और न ही स्टेशन और सिग्नल के पास पटाखा लगाने की जरूरत रह जाएगी। कवच से पूरा सिग्नल सिस्टम कैब में ही दिखेगा। इसमें रेल चालकों को टूल बैग में पटाखा लेकर चलने से मुक्ति मिल जाएगी। रेलवे बोर्ड ने सभी क्षेत्रीय रेलवे से हर साल कोहरे में किए जाने वाले पारंपरिक इंतजामों की सूचना मांगी है। दरअसल, सर्दियों में दृश्यता बहुत कम हो जाती है। ऐसे में स्टेशन से करीब 270 मीटर पहले पटरियों पर बारूद वाले गोल पटाखे (डेटोनेटर) बांध दिए जाते हैं। जैसे ही ट्रेन का पहिया इस पर से गुजरता है, एक जोरदार आवाज होती है। उसे सुनकर लोको पायलट समझ जाता है कि...