नई दिल्ली, सितम्बर 21 -- भाद्रपद शुक्ल पक्ष एकादशी 22 सितंबर को है, इसे परिवर्तिनी एकादशी, जलझूलनी एकादशी है, डोल ग्यारस भी कहते हैं। इस दिन श्री गोविंददेवजी का झूलन महोत्सव मनाया जाता है। इस दिन ठाकुर जी को कई जगह परंपरा के अनुसार श्री शालिग्रामजी को डोली पर विराजमान कर ले जाया जाता है और मंदिर की परिक्रमा की जाती है। इसके बाद उनका पूजन होता है और पंचामृत दूध, दही, घी, मिश्री और शहद मिलाकर पंचामृत का भोग लगाया जाता है। दरअसल यह व्रत श्रीकृष्ण से भी जुड़ा है। श्रीकृष्ण के जन्म के बाद इसी दिन ही मां यशोदा ने बालकृष्ण का जलवा पूजन किया था, उनकों गांव में घुमाया था। जलवा पूजन को कुंआ पूजन भी कहा जाता है। इसी दिन यशोदा मां ने उनके कपड़े धोए थे, इसलिए इसे जलझूलनी और डोल ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है।क्या है परिवर्तिनी एकादशी का महत्व इस दिन...