प्रयागराज, जनवरी 13 -- प्रयागराज, संवाददाता। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में नाद ब्रह्म शिल्प मेला के दूसरे दिन दो सत्र में कार्यक्रम हुए। साहित्यिक संगोष्ठी में 'माघ मेला : वसुधैव कुटुम्बकम के घोष का स्वर' विषय पर मुख्य वक्ता डॉ. रविनंदन सिंह ने कहा कि कल्पवास भारतीय संस्कृति की प्रयोगशाला है। जहां जड़ और चेतन दोनों मिलकर मनुष्यता का सृजन करते हैं। डॉ. शिशिर सोमवंशी ने बताया कि वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा आज विश्व शांति और पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में और अधिक प्रासंगिक हो गई है। आश्रया द्विवेदी ने सईयां से कईदे मिलनवा अहिए पिया परदेसिया व हमके मेलवा घुमाई द हमार सजना भोजपुरी गीतों की प्रस्तुति से समा बांधा। भजन गायक वशिष्ठ मिश्र ने रघुराई रे रघुराई व हम कथा सुनाते जैसे भजनों की प्रस्तुति की तो भानु प्रताप सिंह ने...
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