ललितपुर, अप्रैल 15 -- सिद्धन रोड स्थित कला भवन में पांच अप्रैल से नि:शुल्क कला साधना शिविर में प्रथम चरण में कैलीग्राफी का हिन्दी, अंग्रेजी में लिखने का अभ्यास कराया गया। इसमें पेन, ब्रुश द्वारा संतुलित तरीके से शब्दों को सजाकर लिखने की विधा है। बच्चों को सुलेख में ट्रैफटन, बुलियन, रोमन रनिंग लिपि में लिखने का अभ्यास कराया गया। चित्रकार एवं शिविर आयोजक ओमप्रकाश बिरथरे ने बताया कि दूसरे चरण में वारली पेन्टिंग के बारे में बच्चों को बताया गया। वारली पेन्टिंग महाराष्ट्र की सबसे पुरानी जनजातीय लोक कलाओं में से एक है, जो वारली समुदाय द्वारा बनायी जाती हैं। यह कला लगभग 2500 ईसापूर्व पुरानी है। यह भी पढ़ें- प्रदर्शनी में दिखाया पौराणिक कथाओं के पात्रों सृजनात्मक रूप इसमें सफेद रंग तथा मिट्टी की रंगों से दीवालों पर ज्यामितीय आकृतियों जैसे रेखा, वृ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.