प्रयागराज, मार्च 27 -- विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान की ओर से विश्व रंगमंच दिवस के पर शुक्रवार को शिक्षा में रंगमंच का महत्व विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अलोपीबाग स्थित महाराष्ट्र लोक सेवा मंडल में मुख्य वक्ता डॉ. मुकेश उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा में रंगमंच वास्तव में लर्निंग बाय डूइंग का ही व्यावहारिक स्वरूप है। इसके इतर इसकी कोई और व्याख्या नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत कला को कोर्स में एकीकृत करना एक क्रांतिकारी कदम है। यह न केवल छात्रों की रचनात्मकता निखारेगा बल्कि उनके आत्मविश्वास को उस स्तर पर ले जाएगा, जहां वे भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सके। डॉ. अश्विनी कुमार सिंह ने नाटक की प्राचीन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा और ज्ञान के मेल से ही पूर्ण व्यक्तित्व का निर्माण होता है। डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव...