नई दिल्ली, दिसम्बर 17 -- एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनाने से पहले अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर भी विचार हुआ था। पार्टी के स्तर पर यह चर्चा हुई थी कि क्यों ना मौजूदा प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को ही राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया जाए और उनके स्थान पर पीएम का पद लालकृष्ण आडवाणी को दे दिया जाए। अब्दुल कलाम 2002 में राष्ट्रपति चुने गए थे और उस दौरान लालकृष्ण आडवाणी भाजपा में बेहद मजबूत स्थिति में थे और उन्हें आरएसएस का समर्थन भी अटल बिहारी वाजपेयी के मुकाबले ज्यादा मिला हुआ था। यही कारण था कि अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे खारिज कर दिया था। अटल बिहारी वाजपेयी ने दलील दी थी कि इससे गलत परंपरा शुरू हो जाएगी। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मीडिया सलाहकार रहे अशोक टंडन ने अपनी पुस्तक...