कलम का सफर: राष्ट्रसेवा से नैतिक पतन तक
नई दिल्ली, अगस्त 6 -- स्वाधीनता संग्राम में पत्रकारिता एक मिशन थी। संपादक देश और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए जेल जाते थे। आजादी के बाद तस्वीर बदली और पहली बार तरुण तेजपाल जैसे चर्चित संपादक को दुष्कर्म के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई। आजादी से पहलेबाल गंगाधर तिलक (केसरी): राजद्रोह के आरोप में 6 साल मांडले जेल।गणेश शंकर विद्यार्थी (प्रताप): अंग्रेजों ने कई बार जेल भेजा।लाला लाजपत राय: राष्ट्रवादी लेखन के कारण निर्वासन और जेल।मौलाना अबुल कलाम आजाद (अल-हिलाल): प्रेस जब्त, नजरबंदी और जेल।आजादी के बादतरुण तेजपाल (तहलका): अपनी सहयोगी के यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए। यह भी पढ़ें- आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे : तरुण तेजपाल यह भी पढ़ें- होटल के लिफ्ट में क्या हुआ था उस रात? 2013 में मचा था 'तहलका', अब तरुण तेजपाल द...
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