चंदौली, जून 20 -- शहाबगंज, हिन्दुस्तान संवाद। धान का कटोरा कहे जाने वाले शहाबगंज क्षेत्र में इन दिनों सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कर्मनाशा परियोजना से जुड़ी नहरें सूखी पड़ी हैं और उनमें पानी की जगह धूल उड़ रही है। धान की खेती के महत्वपूर्ण समय में नहरों में पानी न आने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। छोटे और सीमांत किसान सबसे अधिक परेशान हैं। क्योंकि उनके पास निजी सिंचाई के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। यह भी पढ़ें- रजबहों में पानी न होने से धान की पौध सूख रहीसिंचाई व्यवस्थित करने की आवश्यकता क्षेत्र में धान की नर्सरी डालने का समय चल रहा है। बड़े और संपन्न किसान किसी तरह निजी नलकूप, बोरिंग और डीजल पंपसेट के सहारे लगभग 50 प्रतिशत नर्सरी डाल चुके हैं, लेकिन छोटे किसान अभी भी पानी की आस लगाए बैठे हैं। नहरों में पानी न आने के कारण वे नर्स...