बिलासपुर, मई 7 -- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मृतक कर्मचारियों के आश्रितों के हित में एक मील का पत्थर साबित होने वाला एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को दी जाने वाली सहायता राशि (मुआवजा) की गणना किसी पुरानी या काल्पनिक वेतन सीमा के आधार पर नहीं की जा सकती। कोर्ट के अनुसार, कर्मचारी अपनी मृत्यु के समय वास्तव में जो वेतन पा रहा था, उसी 'एक्चुअल सैलरी' को मुआवजे का आधार बनाया जाना चाहिए। इस फैसले से उन हजारों परिवारों को फायदा होगा जिन्हें अब तक नियमों की जटिलता के कारण कम मुआवजा मिल रहा था।ट्रक डाइवर की मौत से जुड़ा है मामला जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की सिंगल जज बेंच ने कहा कि किसी कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार को मिलने वाला मुआवजा पुराने तय वेतन सीमा के आधार पर नहीं, बल...