लखनऊ, जून 26 -- लखनऊ, विशेष संवाददाता। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा कि कर्मचारियों की कमी से राज्य में बिजली संकट गहरा रहा है। लिहाजा छांटे गए संविदा कर्मचारियों को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही निजीकरण का विरोध करने वाले कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई भी वापस ली जाए। संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा है कि बढ़ रही बिजली की मांग के अनुपात में बिजली कर्मचारियों की भारी कमी के कारण बिजली व्यवस्था पर गंभीर दबाव बढ़ता जा रहा है। भीषण गर्मी में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है। वर्ष 2000 में जब राज्य में करीब 60 लाख उपभोक्ता थे तब बिजली कर्मचारियों की संख्या 1.20 लाख थी। अब प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 3.73 करोड़ है जबकि कर्मचारियों की संख्या घटकर 30 हजार से भी कम रह गई है।

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