नई दिल्ली, मई 28 -- मनीषा प्रियम,राजनीतिक विश्लेषक विंध्य पर्वतमाला के दक्षिणी राज्यों में राजनीति की कुछ अपनी विशेषताएं हैं। आवश्यक नहीं कि वहां उत्तर भारत जैसी राजनीति दोहराई जाए। जैसे- केरल में ही वामपंथ और कांग्रेस की लड़ाई पुरानी है। साल 1959 में यहां की नंबूदिरीपाद सरकार को तत्कालीन नेहरू मंत्रिमंडल द्वारा बर्खास्त किए जाने से लेकर कद्दावर वामपंथी नेता पी विजयन की सरकार को हाल में चुनावी शिकस्त देने तक हम इसकी झलक देख सकते हैं, मगर यहां राहुल गांधी के करीबी केसी वेणुगोपाल के बजाय वीडी सतीशन को राज्य की कमान सौंपी गई है, क्योंकि जमीन पर उनकी अच्छी पकड़ है। ठीक इसी तरह की रोचक तस्वीर अब कर्नाटक में उभर रही है। कर्नाटक में साल 2023 के विधानसभा चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे और डीके शिवकुमार के नेतृत्व में कांग्रेस ने जीत हासिल की। भाजपा ...