लखनऊ, अगस्त 12 -- लोन के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने स्पष्ट किया है कि बैंक के लिए यह जरूरी नहीं है कि वह पहले कर्जदार से रकम वसूल करने का प्रयास करे और असफल होने पर ही गारंटर के खिलाफ कार्रवाई करे। न्यायालय ने कहा कि भारतीय संविदा अधिनियम की धारा 128 के तहत गारंटर की देनदारी मुख्य कर्जदार के बराबर होती है। बैंक कर्जदार और गारंटर दोनों के खिलाफ एक साथ वसूली की कार्रवाई कर सकता है।न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने विनीत पांडेय और अनूप कुमार मिश्रा की ओर से दाखिल दो अलग-अलग याचिकाएं खारिज करते हुए यह आदेश दिया। दोनों याचियों ने अपने सहकर्मी विक्रांत दूबे द्वारा लिए गए ऋण के लिए गारंटी दी थी। विक्रांत दूबे ने वर्ष 2022-23 में यूपी पोस्टल प्राइमरी कोऑपरेटिव बैंक से 50 हजार रुपये का फेस्टिवल लोन, तीन लाख रुप...