नई दिल्ली, मई 31 -- ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना जाता है। यह विस्तार, ज्ञान, भाग्य, प्रचुरता और समृद्धि के कारक ग्रह हैं। गुरु जहां बैठते हैं और जहां देखते हैं, वहां आशीर्वाद की वर्षा करते हैं। जब भी गुरु अपनी राशि बदलते हैं, तो पूरे संसार की ऊर्जा और विकास की दिशा बदल जाती है। 2 जून 2026, मंगलवार को गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतिष में कर्क राशि में गुरु का होना सबसे शुभ और शक्तिशाली माना जाता है। कर्क एक जल तत्व की राशि है जो भावनाओं, परिवार, सुरक्षा, ममता और अंतरात्मा से जुड़ी है। गुरु का यह गोचर हमें बाहरी दिखावे से हटाकर मानसिक शांति और अपनों के करीब ले जाएगा।गुरु गोचर का महत्व गुरु का कर्क राशि में गोचर लगभग एक साल तक रहेगा। इस दौरान लोग अधिक भावुक, परिवार उन्मुख और घरेलू सुख की ओर ...