फतेहपुर, अप्रैल 18 -- फतेहपुर। सरकार ने गांवों को गंदगी से मुक्त करने और ओडीएफ के सपने को धरातल पर उतारने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन हकीकत में यह मिशन खुद अपनी बदहाली की जद में है। करोड़ों के बजट से बने सामुदायिक शौचालय आज शोपीस बनकर रह गए है, कहीं दरवाजों पर जंग खाते ताले लटके हैं, तो कहीं झाड़ियों ने कब्जा कर लिया है। दावों और हकीकत के बीच की खाई इतनी गहरी है कि ग्रामीण आज भी डिब्बा लेकर खेतों की राह पकड़ने को मजबूर हैं। आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान' ने जब जिले के विभिन्न ब्लॉकों की पड़ताल की, तो स्वच्छता के दावों की कलई खुल गई। यह भी पढ़ें- लाखों की लागत से बना सामुदायिक शौचालय बदहाल पेश हैं एक रिपोर्ट... बदबू और अव्यवस्थाओं से बेहाल ग्रामीणधाता। नगर पंचायत के कल्यानपुर कचरौली कलनापुर गांव में सामुदायिक शौचालय में गंदगी का अंबार ...