मुंगेर, अगस्त 1 -- ​मुंगेर, निज संवाददाता। नौनिहालों को कुपोषण के चक्रव्यूह से निकालने के लिए जिले में हर साल आंगनबाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान और टेक-होम राशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। पोषण ट्रैकर पर दर्ज ताजा आंकड़ों ने विभागीय मुस्तैदी और दावों की पोल खोलकर रख दी है। जिले में 0 से 5 वर्ष तक के 1.22 लाख बच्चों की ग्रोथ मॉनिटरिंग (शारीरिक माप) में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। ​ठिंगनापन और कुपोषण की दोहरी मारः जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिले में मापे गए बच्चों में से 42 प्रतिशत बच्चे ठिंगनापन के शिकार पाए गए हैं, यानी उम्र के हिसाब से उनका शारीरिक विकास रुक गया है। वहीं 18 प्रतिशत बच्चों का वजन मानक से काफी कम दर्ज किया गया है। आंकड़े बता...