अल्मोड़ा, सितम्बर 29 -- अल्मोड़ा। पर्वतीय क्षेत्रों में सिंचाई के लिए काफी कम पानी उपलब्ध होता है। वैज्ञानिकों को किसानों के लिए कम पानी के प्रयोग वाली प्रजातियां विकसित करने की जरूरत है। यह बात भाकृअनुप-विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में हुए कृषि विज्ञान मेले में विशेषज्ञों ने कही। जैविक कृषि पर जोर देने के साथ जलवायु परिवर्तन से खेती को बचाने के भी सुझाव दिए। वीपीकेएएस के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र हवालबाग में 'सशक्त और सुपोषित महिला कृषक : विकसित कृषि का आधार' थीम पर 53वां कृषि विज्ञान मेला लगा। संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्मी कान्त ने संस्थान की उपलब्धियों के बारे में बताया। कृषि विज्ञान चयन मंडल के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने बारानाजा पद्धति को अपनाने पर जोर दिया। कहा कि इससे एक फसल का अच्छा उत्पादन ना होने पर भी दूसरी फसल अच्छा उत...