नई दिल्ली, जनवरी 30 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। आपरेशन सिंदूर के दौरान यह देखा गया कि ड्रोन एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौती कम ऊंचाई पर उड़कर आने वाले ड्रोन की पूर्व सूचना हासिल करने की होती है। इसके लिए कोई विशिष्ट तकनीक अभी भी नहीं है, लेकिन भारतीय सेना के पास पहले से मौजूद कम क्षमता के राडार ड्रोन को ट्रैक करने में सफल हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, सेना के पास कम क्षमता के अनेक राडार मौजूद हैं, जो अब दुश्मन के विमानों एवं मिसाइलों को ट्रैक करने के लिए इस्तेमाल नहीं होते हैं क्योंकि इनकी रेंज 50 किलोमीटर से कम होती है। इसी प्रकार ऊंचाई पर नजर रखने की रेंज भी कम होती है। अब सैकड़ों किलोमीटर दूर से मिसाइल और विमानों को ट्रैक करने वाले राडार आ चुके हैं तथा सेना उन्हीं का इस्तेमाल कर रही है। कम क्षमता के कई पुराने राडा...