मोतिहारी, मार्च 25 -- मौसम की मार झेलकर घर घर ऑनलाइन सामान पहुंचाने वाले बाइक राइडरों की कम्पनी अनदेखी करती है। सुरक्षा बीमा के साथ उन्हें कमीशन भी कम दिया जाता है। जिससे उनके परिवार का पालन-पोषण भी ठीक से नहीं होता है। दिन रात सड़कों पर संघर्ष करते हैं। निर्धारित समय पर ही सामान पहुंचाना पड़ता है। देरी होने पर उपभोक्ताओं से विवाद भी होता है। अजय कुमार का कहना है कि कई ऐसे बाइक राइडर हैं जो आज दिव्यांग हो चुके हैं। ऑनलाइन सामान जल्दी पहुंचाने की होड़ में दुघर्टनाग्रस्त हो गये। अपने खर्च से इलाज कराये उसके बावजूद सड़क पर संघर्ष करने लायक नहीं बचे हैं। उन्हें कम्पनी की ओर से कोई सहायता नहीं मिली। राइडर विकास कुमार का कहना है कि जानपुल चौक पर व एक मार्ट के बगल में ईरिक्शा की चपेट में बाइक राइडर आकर दुघर्टना का शिकार हुआ। कम्पनी की ओर से उसका...
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