नई दिल्ली, मार्च 27 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ईरान से जुड़े संकट के बाद भारतीय रुपये पर दबाव देखने को मिला है। डॉलर के मुकाबले रुपया हाल के दिनों में करीब तीन प्रतिशत तक कमजोर हुआ है। 28 फरवरी को जहां एक डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत 91 रुपये के आसपास थी तो वहीं शुक्रवार को 94.82 रुपये के स्तर पर पहुंचा है। यह सिर्फ रुपये में गिरावट नहीं है, बल्कि भारत के लिए आयात अब महंगा होता जा रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष में डॉलर के मुकाबले रुपया 10 फीसदी गिर चुका है जो वित्त वर्ष 2012 के बाद रुपये में सबसे बड़ी गिरावट है। वित्त वर्ष 2012 में रुपया 10 फीसदी से ज्यादा टूटा था लेकिन इस बार युद्ध के चलते रुपये में गिरावट का दौर जारी है। इससे भारत का आयात बिल भी तेजी से बढ़ रहा है। रुपये में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों म...
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