नई दिल्ली, जनवरी 24 -- हार्ट अटैक की स्थिति से गुजरना किसी भी व्यक्ति के लिए बेहद डरावना और जिंदगी बदल देने वाला अनुभव होता है। अस्पताल से छुट्टी मिलते ही रोगी के मन को कई तरह के सवाल और परेशानी जकड़ने लगती हैं- क्या मैं पहले की ही तरह दोबारा अपने काम उसी एनर्जी के साथ कर पाऊंगा? क्या मेरा कमजोर दिल मेरा साथ देगा? अगर आप या आपका कोई पहचान का व्यक्ति अभी-अभी हार्ट अटैक का जोखिम झेलकर अस्पताल से बाहर आया है तो उसके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि हार्ट अटैक जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि एक नई और अधिक जागरूक शुरुआत होती है। एक कमजोर दिल के साथ जीना हार मान लेना नहीं है, बल्कि अपनी जीवनशैली को एक नई लय और अनुशासन में ढालना है। सही डॉक्टरी सलाह, संतुलित आहार और अपनी सीमाओं को समझकर, आप एक लंबी जिंदगी जी सकते हैं। यह भी पढ़ें- क्या आप जानते हैं ठंड म...