नई दिल्ली, नवम्बर 9 -- Bihar Elections: बिहार के जहानाबाद रेलवे स्टेशन से दस किलोमीटर दूर सदर प्रखंड का सिकरिया गांव। यह गांव कभी 'नक्सलवाद का गढ़' के रूप में चर्चित था। यहां प्रशासन की नहीं, नक्सलियों का कानून चलता था। भाकपा माओवादी और पीपुल्स वार वोट बहिष्कार का नारा देते थे। जिसने मतदान किया, उसे सजा मिलती थी। माफी मांगनी पड़ती थी और जुर्माने के रूप में उठक-बैठक करनी पड़ती थी। बुजुर्ग रामजी प्रसाद बताते हैं कि 90 के दशक तक यहां नक्सलियों के द्वारा प्रत्येक चुनाव में वोट बहिष्कार की घोषणा की जाती थी। कुछ लोग साहस कर वोट देने जाते थे। अगर किसी ने वोट दे दिया और बाद में नक्सलियों को पता चल गया तो उन्हे दंडित किया जाता था। अब यह अतीत की बात हो चुकी है। यह भी पढ़ें- LIVE: अंतिम दिन दिग्गजों का जोर; तेजस्वी का हैप्पी बर्थडे, सहनी की सभा रद्द...
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