नई दिल्ली, अक्टूबर 22 -- जिंदगी जब इम्तिहान लेती है तो कई बार अच्छे-अच्छों के हौसले पस्त हो जाते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी तकलीफों को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लेते हैं। उत्तर प्रदेश की अर्चना जायसवाल की कहानी कुछ ऐसी ही है। जिस उम्र में बच्चे खिलौनों की जिद करते हैं उस दौर में अर्चना ने अपने परिवार को मुफलिसी से लड़ते देखा। उनके पिता ने कभी घर चलाने के लिए सड़कों पर रिक्शा खींचा था और आज उन्हीं की बेटी यूपी के छह जिलों में तालीम की ऐसी अलख जगा रही है जिससे हजारों घरों का अंधेरा दूर हो रहा है। अर्चना अपने 'शिक्षा साथी' नाम के स्टार्टअप के जरिए न सिर्फ गांव के साढ़े सात हजार से ज्यादा बच्चों को बेहद मामूली फीस में अच्छी कोचिंग दे रही हैं बल्कि सैकड़ों ग्रामीण लड़कियों को अपने पैरों पर खड़ा भी कर रही हैं। आखिर एक रिक्शा चा...