नई दिल्ली, अक्टूबर 29 -- राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने अपने फैसले में कहा कि निर्माण में देरी या पजेशन (कब्जा) सौंपने में देरी के कारण आवंटी द्वारा जमा रकम वापस करने के मामलों में, 9 से 18 फीसदी या उससे भी अधिक का हर्जाना ब्याज देना उचित और सही माना गया है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए यह टिप्पणी की है। पीठ ने यह साफ किया कि हर्जाना /ब्याज हर मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। आयोग ने कहा कि हमने इस मामले में हुई अनुचितता, कमियों और बिल्डरों के पूरे रवैये पर गौर किया है। इसमें यह बात भी शामिल है कि 2018 में कानूनी नोटिस के जरिए की गई जायज और उचित मांग को उन्होंने नजरअंदाज कर दिया, जबकि उस समय तक निर्माण कार्य संतोषजनक ढंग से आगे नहीं बढ़ा था और 2023 तक भी पूरा नहीं हुआ। ...